भारत-जापान शिखर सम्मेलन 2026: पूर्वोत्तर में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे भारत और जापान

भारत-जापान शिखर सम्मेलन 2026

भारत-जापान शिखर सम्मेलन 2026: पूर्वोत्तर में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे भारत और जापान

नई दिल्ली: भारत-जापान शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और जापान पूर्वोत्तर भारत में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी का उद्देश्य निवेश बढ़ाना, रोजगार के नए अवसर पैदा करना और क्षेत्र में मजबूत औद्योगिक आधार तैयार करना है।

पीयूष गोयल ने क्या कहा?

शिखर सम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि दोनों देश विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में उद्योग, विनिर्माण (Manufacturing), बुनियादी ढांचे और कौशल विकास को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं।

पूर्वोत्तर भारत पर क्यों है खास फोकस?

सरकार का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत निवेश और व्यापार की अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं के जरिए इस क्षेत्र को देश और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है।

किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग?

भारत और जापान के बीच मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, हरित ऊर्जा (Green Energy), डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। दोनों देशों का लक्ष्य निवेश बढ़ाकर आर्थिक विकास को नई रफ्तार देना है।

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निवेश और रोजगार पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि जापानी निवेश बढ़ने से पूर्वोत्तर भारत में नए उद्योग स्थापित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत-जापान संबंध क्यों हैं अहम?

भारत और जापान लंबे समय से आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी साझेदार रहे हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने पर भी लगातार काम कर रहे हैं।

निष्कर्ष

भारत-जापान शिखर सम्मेलन 2026 में पूर्वोत्तर भारत के औद्योगिक विकास को लेकर दोनों देशों की प्रतिबद्धता एक बार फिर सामने आई है। यदि प्रस्तावित योजनाएं तय समय पर लागू होती हैं, तो इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

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